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किताब समीक्षा: ‘Why I am an Atheist’ को पढ़ना 21वीं सदी में युवाओं के लिए क्यों है जरुरी

Why I am an Atheist Book Review: मैं नास्तिक क्यों हूं एंव अन्य लेख ( Why I am an Atheist and Other Articles ) नाम से प्नकाशित किताब के अंदर मौजूद लेखों को स्वंय शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ( Bhagat Singh ) ने अपनी कलम से लिखा है। यह किताब भगत सिंह के लेखों का संग्रह है।

Why I am an Atheist Book Review: मैं नास्तिक क्यों हूं एंव अन्य लेख ( Why I am an Atheist and Other Articles ) नाम से प्नकाशित किताब के अंदर मौजूद लेखों को स्वंय शहीद-ए-आज़म भगत सिंह ( Bhagat Singh ) ने अपनी कलम से लिखा है। यह किताब भगत सिंह के लेखों का संग्रह है। जोकि उन्होने अपने जेल समय और क्रांतिकारी जीवन में लिखें थे। इस किताब की समीक्षा करते हुए,  यहां इस बात पर ज्यादा जोर दिया गया है कि आपको यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए। क्योंकि भारत देश में युवाओं से लेकर राजनीतिक पार्टियां तक भगत सिंह के नाम के आड़े कई ऐसे काम कर जाती हैं जोकि उनकी सोच से कतई तालुक नहीं रखते हैं। ऐसे में आपको इस किताब के माध्यम से भगत सिंह को समझना जरुरी है।

किताब ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ की समीक्षा –

‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ नाम से प्रकाशित किताब शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के लेखों का संग्रह है जोकि उस समय के कई दैनिक अखबारों में छपे। इन लेखों के माध्यम से भगत सिंह ने सिधा उस समय की बड़ी सी बड़ी समस्याओं पर हमला बोला। इन हमलों में उन्होने पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे क्रांतिकारियों तक को आड़े हाथों लिया। भगत सिंह के लिखे गए लेख आज भी उतने ही महत्व रखते हैं, जितने की तब-जब भगत सिंह ने देश के हालातों को देखते हुए उन्हे लिखा था।

आजादी से पहले भी होते थे हिंदू-मुस्लिम दंगे –

आजादी के पहले भी हमारे देश में हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईशाई धर्मों के नाम पर दंगे और लड़ाई जारी थे। कहीं न कहीं भगत सिंह को इस बात का अंदेशा था कि हम अंग्रेजों से तो जरुर ही जंग जीत जाएंगे लेकिन फिर उस आजादी का क्या? जहां सभी के लिए आजादी नहीं होगी। ऐसे में कैसे भगत सिंह जेल में रहकर भी शांत रह सकते थे। उन्होने अपनी कलम का सहारा लिया और उनके लेखों को ( Why I am an Atheist Book Review ) उस समय के दैनिक अखबारों में जगह मिलने लगी। भगत सिंह ने वह हर एक मुद्दा उठाया जोकि समाज के लिए घातक बन हुए थे।

भगत सिंह का अपने साथियों के नाम आखिरी पत्र –

इस किताब में हमें वह आखिरी पत्र जोकि भगत सिंह ने अपनी फांसी से पहले साथियों के नाम 22 मार्च 1931 को लिखा था, उसे भी पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। जिसमें उन्होने अपनी दिली तमन्ना का इजहार भी किया। इस किताब में वह पत्र भी है जोकि भगत सिंह जी ने अपने पिता के नाम लिखकर आजादी को अपनी दुल्हन बता घर छोड़, कानपुर क्रांतिवीरों के पास चले गए थे।

फिल्मों में दिखाए गए भगत सिंह को भूल जाएंगे आप –

‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ नाम से प्रकाशित इस किताब में दिए गए इन लेखों को जब आप पढ़ना शुरू करेंगे तो आप जरुर ही यह महसूस करेंगे कि भगत सिंह जिन्हे अभी तक आप टीवी और फिल्मों के माध्यम से देखते और जानते आए हैं। सच में वह उस बनाई गई छवि से काफी अलग हैं। उनके विचार आज आपको देखने से नहीं दिखेंगे। भगत सिंह जी के सपनों का भारत! कैसा होता आज यह भी आप इस एक किताब को पढ़कर महसूस कर सकते हैं। भगत सिंह, आखिरकार क्यों एक नास्तिक थे, वो क्यों भगवान में विश्वास नहीं रखते थे, इतना ही नहीं वह जोरदार खुलेआम मनुस्मृति जैसी किताबों का विरोध करते थे, उन्होने देश में उपस्थित अछूत समस्या को लेकर भी अपनी कलम से लड़ाई लड़ी और पंड़ित मालवीय जैसे क्रांतिकारियों को अपनी कलम के माध्यम से कटघरे में भी खड़ा कर दिया।

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आजादी के लिए जरुरी है युवा जोश –

भगत सिंह का मानना था कि देश को आजादी युवा जोश के बीना कभी नहीं मिल सकती है। उन्होने कभी भी युवाओं को हाथ में बम और जेब में पिस्तल लेने के लिए नहीं कहा। लेकिन उनका यह जरुर कहना था कि अगर कल आपको आजादी चाहिए तो उसके लिए आज आपको खुद पैर मारने होंगे। इसके लिए आपको चाहे जो करना पड़े आप उसे करने के लिए तैयार रहें।

भगत सिंह के वह लेख जिन्हे अखबारों में मिली जगह –

इस किताब में भगत सिंह के ऐसे कई पत्रों का जिक्र है, जोकि दैनिक अखबार में भी प्रकाशित हुए। जैसे कि अछूत समस्या, धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम, नये नेताओं के अलग-अलग विचार, विध्यार्थियों के नाम पत्र, सम्पादक माडर्न रिव्यू के नाम पत्र, सम्प्रादायिक दंगे और उनका इलाज। यह कुछ लेखों के शीर्षक हैं। बाकी आप जब इस किताब के माध्यम से इन पुरे लेखों को पढ़ेंगे तब और अच्छी तरह से आप शहीद-ए-आज़म भगत सिंह को समझ पाएंगे।

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शहीद ए आजम भगत सिंह की कलम से लिखे पत्रों को लेकर आई इस किताब आप जरुर ही पढ़ें। क्योंकि इन लेखों को पढ़कर ही आप भगत सिंह की सोच को सही मायने में समझ सकेंगे। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ज्ञान भगत सिंह को लेकर काफी भ्रमित है। ऐसे में आप अपने ज्ञान के दीपक को जलाने के सीधा भगत सिंह के लेखों को पढ़ें जोकि उन्होने खुद लिखें थे। न कि किसी बिचौलियों के फिलटर किए गए कुछ अंस जोकि वह भगत सिंह का नाम लेकर अपने काम को निकालने के लिए आप सभी के बीच रखता है।

‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ किताब से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी-

‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ इस किताब को ओम साईं टेक बुक्स ने पब्लिस किया है। इस किताब ( Why I am an Atheist Book Review ) की अधिकतम कीमत 199 रुपये है। लेकिन ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से किताब खरीदने पर आप इस किताब को सस्ते दामों पर भी खरीद सकते हैं। इस किताब में कुल 21 पत्र शीर्षक हैं। जोकि भगत सिंह जी के पहले लेख ‘मैं नास्तिक क्यों हूं’ से शुरु होते हैं और आखिरी पत्र ‘शहादत से पहले साथियों को अंतिम पत्र’ के नाम से समाप्त होते हैं।

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